Wednesday, April 1, 2020

पूरी दुनिया में लोग इस्लाम क्यों छोड़ रहें हैं #AwesomeWithoutAllah

इस्लाम के जानकरों से अनुरोध है की अपना उत्तर कमेंट बॉक्स में विज्ञानिक आधार सहित दें

Tuesday, March 31, 2020

1400 साल पहले जो पैगम्बर पैदा हुए उनके अम्मी अब्बा कौन-सा धर्म मानते थे ?

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Saturday, March 14, 2020

भारत के मुस्लमान अपनी दस पीढीयों के नाम बताये अगर वे हिन्दू धर्म को छोड़कर मुस्लिम नहीं बने हैं तो ?

प्रश्न के शेष भाग : अपने पिता , दादा,  परदादा , आदि का नाम बताएं


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Friday, March 6, 2020

इस्लाम में “मुता निकाह ” नाम से एक प्रथा चालू है इसका क्या मतलब है

उत्तर : इस्लाम में “मुता” नाम से एक प्रथा चालू है | किसी भी स्त्री को पैसे देकर थोड़े समय के लिए कुछ घंटों या दिनों के लिए बीबी बना लेना और उससे विषयभोग करना तथा फिर सम्बन्ध विच्छेद करके त्याग देना “मुता निकाह ” कहलाता है |

एक मर्द कितनी ही औरतों से मुता कर सकता है, इससे स्पष्ट है की “इस्लाम में नारी का महत्व केवल पुरुष की पाशविक वासनाओं की पूर्ति करना मात्र है आश्चर्य है की जिस इस्लाम मजहब में मुता जैसी गन्दी प्रथा चालु है | उस पर भी वह नारी के सम्मान की इस्लाम में दुहाई देने का दुःसाहस करते है| यह इस्लाम का मजहबी रिवाज है | अय्याशी के लिए मुता करने पर औरत उस मर्द से अपनी मेहर (विवाह की ठहरौनी की रकम) या (फीस) मांगने की भी हकदार नहीं होती है | यदि मुता के दिनों वा घंटों में विषयभोग करने से उस स्त्री को गर्भ रह जावे तो उसकी उस मर्द पर कोई जिम्मेवारी नहीं होती है


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Tuesday, March 3, 2020

मुस्लिम देशों (पाकिस्तान बांग्लादेश) में अल्पसंख्यकों की जनसंख्या कम क्यों होती जा रही है ?

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क्या ईश्वर और अल्लाह एक ही है ?

ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं।
१) ईश्वर सर्वव्यापक (omnipresent) है, जबकि अल्लाह सातवें आसमान पर रहता है.
२) ईश्वर सर्वशक्तिमान (omnipotent) है, वह कार्य करने में किसी की सहायता नहीं लेता, जबकि अल्लाह को फरिश्तों और जिन्नों की सहायता लेनी पडती है.
३) ईश्वर न्यायकारी है, वह जीवों के कर्मानुसार नित्य न्याय करता है, जबकि अल्लाह केवल क़यामत के दिन ही न्याय करता है, और वह भी उनका जो की कब्रों में दफनाये गए हैं.
४) ईश्वर क्षमाशील नहीं, वह दुष्टों को दण्ड अवश्य देता है, जबकि अल्लाह दुष्टों, बलात्कारियों के पाप क्षमा कर देता है. मुसलमान बनने वाले के पाप माफ़ कर देता है।
५) ईश्वर कहता है, "मनुष्य बनों" मनु॑र्भव ज॒नया॒ दैव्यं॒ जन॑म् - ऋग्वेद 10.53.6,
जबकि अल्लाह कहता है, मुसलमान बनों सूरा-2, अलबकरा पारा-1, आयत-134,135,136
६) ईश्वर सर्वज्ञ है, जीवों के कर्मों की अपेक्षा से तीनों कालों की बातों को जानता है,जबकि अल्लाह अल्पज्ञ है, उसे पता ही नहीं था की शैतान उसकी आज्ञा पालन नहीं करेगा, अन्यथा शैतान को पैदा क्यों करता?
७) ईश्वर निराकार होने से शरीर-रहित है, जबकि अल्लाह शरीर वाला है,एक आँख से देखता है.
मैंने (ईश्वर) ने इस कल्याणकारी वेदवाणी को सब लोगों के कल्याण के लिए दिया हैं - यजुर्वेद 26/
''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' (10.9.37 पृ. 374) (कुरान 9:37) .
८- ईशवर कहता है सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम् ।
देवां भागं यथापूर्वे संजानाना उपासते।-(ऋ० 10/191/2)
अर्थ:-हे मनुष्यो ! मिलकर चलो,परस्पर मिलकर बात करो। तुम्हारे चित्त एक-समान होकर ज्ञान प्राप्त करें। जिस प्रकार पूर्व विद्वान,ज्ञानीजन सेवनीय प्रभु को जानते हुए उपासना करते आये हैं,वैसे ही तुम भी किया करो।
क़ुरान का अल्ला कहता है ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन 'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सखती पायें।'' (11.9.123 पृ. 391) (कुरान 9:123) .
९- अज्येष्ठासो अकनिष्ठास एते सं भ्रातरो वावृधुः सौभाय ।-(ऋग्वेद 5/60/5)
अर्थ:-ईश्वर कहता है कि हे संसार के लोगों ! न तो तुममें कोई बड़ा है और न छोटा।तुम सब भाई-भाई हो। सौभाग्य की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ो।
''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।'' (10.9.28 पृ. 371) (कुरान 9:28)
१० क़ुरान का अल्ला अज्ञानी है वे मुसलमानों का इम्तिहान लेता है तभी तो इब्रहीम से पुत्र की क़ुर्बानी माँगीं। वेद का ईशवर सर्वज्ञ अर्थात मन की बात को भी जानता है उसे इम्तिहान लेने की अवशयकता नही।
११ अल्ला जीवों के और काफ़िरों के प्राण लेकर खुश होता है लेकिन वेद का ईशवर मानव व जीवों पर सेवा भलाई दया करने पर खुश होता है। ऐसे तो अनेक प्रमाण हैं, किन्तु इतने से ही बुद्धिमान लोग समझ जायेंगे की ईश्वर और अल्लाह एक नहीं हैं ।




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दारुल हरब और दारुल इस्लाम क्या है ?

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अल ताकिया क्या होता है ?

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मिशन "गजवा ए हिन्द" क्या है ?

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